-
544
छात्रछात्र: 544
-
542
छात्राएंछात्राएं: 542
-
31
कर्मचारीशैक्षिक: 27
गैर-शैक्षिक: 03
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय बरगढ़ ने 1996 में एक अस्थायी भवन में कक्षा I से V तक के लिए काम करना शुरू कर दिया। वर्ष 2006 में नवनिर्मित भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। नई इमारत एसीसी सीमेंट नगर रोड, बारडोल में स्थित है। यह 1 सेक्शन स्कूल है।...
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवीनता को शुरू करना और बढ़ावा देना...
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए...
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर मैं देश के समस्त शिक्षक समुदाय को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
आज जब शिक्षा का क्षेत्र तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब भी शिक्षण की मूल भावना और उसका सार शाश्वत है। देशभर के केन्द्रीय विद्यालयों में हमारे शिक्षक पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और अटूट उत्साह के साथ शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री सरदार सिंह चौहान
उप आयुक्त
तत्कर्म यन्न बंधाय सा विद्या या विमुक्तये। आयासायापरम कर्म विद्यान्या शिल्पनैपुणम ।। – श्री विष्णुपुराण अर्थात जो बंधन उत्पन्न न करे वह कर्म है और जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे वह विद्या है। शेष कर्म तो परिश्रम स्वरूप है तथा अन्य विधायें तो मात्र कला कौशल ही है। भारतीय ऋषि -मुनियों व मनीषियों ने ज्ञान (विद्या) को मनुष्य की मुक्ति का साधन कहा है। मनुष्य को भय, भूख, दुर्विकार , दुष्प्रवृत्तियाँ , दुराचरण, निर्बलता , दीनता व हीनता ,रोग-शोक इत्यादि से मुक्ति की अभिलाषा अनंतकाल से है। श्री विष्णुपुराण का उपरोक्त महावाक्य हमें यही संदेश देता है कि मनुष्य को ज्ञान के द्वारा अपने समस्त क्लेशों से मुक्ति पाने का पुरुषार्थ करना चाहिए | विद्या त्याग और तपस्या का सुफल होती है इसीलिए ज्ञान की उपलब्धि सदैव श्रमसाध्य है| आइये , हम सभी अनुशासित होकर, समर्पित भाव से समस्त उपलब्ध साधनों का मर्यादापूर्वक उपभोग करते हुए ज्ञानार्जन का सद्प्रयास करें| अपनी दिनचर्या में उचित आहार , विहार और विचार का समावेश करते हुए व्यक्ति के रूप मे प्रकृति प्रदत्त अनंत संभावनाओं को ज्ञान की पवित्र ऊर्जा के आलोक में पल्लवित व पुष्पित करें | हम सभी कृष्ण यजुर्वेद के तैत्रीय उपनिषद के इस सूत्र का प्रतिदिन अपने विद्यालयों में प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में सस्वरपाठ करते हैं :- ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु , सह वीर्यम करवावहै | तेजस्वि नावधीतमत्सु मा विद्विषावहै, ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।। आइये , इस सूत्र में छुपे महान संदेश को समझें और अपने जीवन में आत्मसात कर अपना नित्य कर्म करें | मैं , भुवनेश्वर संभाग के समस्त अधिकारियों , प्राचार्यों , शिक्षकों , विद्यार्थियों व कार्मिकों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ और सभी के लिए सफल व सुखद भविष्य की कामना करता हूँ |
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श्री अखय रॉय
प्राचार्य
केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना का एक उद्देश्य पूरे भारत में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों को एक समान शैक्षिक पाठ्यक्रम और पर्यावरण प्रदान करना है। दूसरी ओर, भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित केन्द्रीय विद्यालयों में, यह सभी वर्गों के छात्रों के मन में राष्ट्रीय एकता और भारतीयता की भावना पैदा कर रहा है। यह लक्ष्य या उद्देश्य कठिन है लेकिन असंभव नहीं है। इस उद्देश्य को प्राप्त करने में, शिक्षक वह केंद्र बिंदु है जिसके कंधों पर इस महान लक्ष्य और उद्देश्य को पूरा करना है। मेरे विचार में, यदि शिक्षा को औपचारिकताओं की सीमाओं से बाहर ले जाया जाता है और जानकारी और तथ्यों की परिधि से, छात्रों की जीवन शैली में सकारात्मक परिवर्तन और कार्य के व्यवहार के आधार पर, कार्य समर्पित भाव पूर्ण समर्पण के साथ किया जाना चाहिए, फिर केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना के सभी उद्देश्य। और लक्ष्यों को अधिक आसानी से और जल्दी से पूरा किया जा सकता है। शिक्षा जो जीवन के श्रेष्ठ चरित्र, श्रेष्ठ चरित्र और सभी चिंताओं के लिए मुक्ति का माध्यम है, वही शिक्षा के अर्थ में सत्य है। तभी, एक कवि की इन पंक्तियों को अनजाने में याद किया जाता है शिक्षा जीवन का प्रकाश है, शिक्षा जीवन का प्रकाश है श्रंगार चरित्र है, यह क्षमताओं का विकास है।
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शिक्षक
विद्यार्थी
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दिव्यांग लोगों के लिए स्मार्ट बाइक
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10वीं कक्षा
12वीं कक्षा
विद्यालय परिणाम
वर्ष 2022-23
उपस्थित 101 उत्तीर्ण 98
वर्ष 2023-24
उपस्थित 93 उत्तीर्ण 90
वर्ष 2024-25
उपस्थित 89 उत्तीर्ण 89
वर्ष 2025-26
उपस्थित 83 उत्तीर्ण 83
वर्ष 2022-23
उपस्थित 84 उत्तीर्ण 81
वर्ष 2023-24
उपस्थित 84 उत्तीर्ण 74
वर्ष 2024-25
उपस्थित 69 उत्तीर्ण 69
वर्ष 2025-26
उपस्थित 52 उत्तीर्ण 50